मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

रसों का राजा........

कहना न होगा कि शीर्षक अजीब सा लग रहा है किंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, क्योंकि इस शीर्षक के अंतर्गत हम रसों के राजा की बात करने जा रहे हैं। आप कहेंगे कि इक्जाम में तो नौ ही रस याद किए यह दसवां कहां से आ टपका। महोदय मैं आपको कतई भटका नहीं रहा हूँ क्योंकि दसवें रस को तो हम पढ़ते नहीं है ,किंतु सुबह से शाम तक में इसका पाला जरूर पड़ जाता है और न चाहते हुए भी कहीं न कहीं हम इसकी चपेट में आ ही जाते हैं। इस दसवें रस का नाम ही निंदा रस है जिसका रसास्वादन हम समय समय से करते रहते हैं। इस रस का आनंद लेने के लिए किसी बड़े आयोजन की जरूरत भी नहीं होती है क्योंकि जहां दो तीन मित्र इकट्ठा हुए वहीं यह रस अपने आप बहने लगता है और सामग्री भी अपने आप आने लगती है। तुर्रा यह कि इसका मजा लेने से कोई चूकना भी नहीं चाहता और चाहे भी क्यों । सभी अपनी भड़ास इसी के माध्यम से निकाल लेना चाहते हैं क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया तो भोजन न पचने के साथ-साथ डिप्रेशन जैसी घातक बीमारियों के आने का खतरा बना रहता है। कई लोगों को तो इस रस में डूबे रहना इतना अच्छा लगता है कि इसके चक्कर में वे अपने महत्वपूर्ण कार्य भी भूल जाते हैं। पुरूष व महिलाएं दोनों इसका भरपूर मजा लेते हैं और लें भी क्यों नहीं मुफ्त व अनलिमिटेड जो है। दसवें रस के चक्कर में बेचारे नौ रस पिटते हैं जिनको हम बचपन से याद करते आ रहे हैं। जो अपने को इस रस से बचते हुए दिखाते हैं वे कहते हैं कै कि हम तो किसी के बारे में कुछ कहना नहीं चाहते लेकिन क्या करें....सही बात है इस दसवें रस से बचना बड़ा मुश्किल है और यह हमारे लिए चुनौती भी है कि इससे कैसे बचें ।कुलमिलाकर सकारात्मक रूप से तो हमें इस रस का प्रयोग करना ही होगा क्योंकि इससे बचने पर हम बोझिल हो सकते हैं .....आपका क्या बिचार है...

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